अभी अभी

6/recent/ticker-posts

हमारा स्वार्थ

सो बार कोसा ऊपर वाले को फूटी किस्मत की खातिर
पर सर ना झुका दरबार में  बे पनाह रहमत की खातिर
-अनिरुद्ध शर्मा

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ