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चरित्र का चोला
चरित्र का चोला
अनिरुद्ध शर्मा
दिसंबर 28, 2015
यूँ मेरे चोले को देख मेरी पहचान ना कर
ये तो मैला ही रहता है
मन अपना मैं साफ़ रखता हूँ
यही तो इंसान का चरित्र कहता है
-अनिरुद्ध शर्मा
कविता
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