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जिस्म की नुमाइश

हुनर तो कुछ बचा नही बस जिस्म की नुमाइश बची है
संस्कृति छोड़ ईमान छोड़ बस पैसे की होड़ मची है
-अनिरुद्ध शर्मा

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