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खुद की जिम्मेदारी

अभी कुछ दिनों पहले दिल्ली में सम विषम नियम लागू हुआ था , हालांकि यह सिर्फ एक प्रयोग था और मात्र 15 दिन के लिए ही किया गया था। इस प्रयोग के पूरा होने पर नतीजे चौकाने वाले थे। जिस मकसद से यह चालू किया गया था, उसपर तो इतना ज्यादा प्रभाव दिखाई दिया नहीं , परंतु एक दूसरा मकसद हल होता नजर आया।
जिस मकसद के लिए यह चलाया था वह था प्रदूषण, और जो मकसद इससे हल होता नजर आया, वह था भीड़ और जाम।
और अब जनता इस नियम को दुबारा लाना चाहती है। प्रदूषण के लिए नहीं बल्कि जाम से छुटकारा पाने के लिए।
मैं दिल्ली की जनता से पूछना चाहता हूँ की इस नियम की जरूरत ही क्यों पड़ी ?
हम अपने आप से इस नियम को क्यों नहीं लागू कर सकते।
हम बिना इस नियम को लाये क्यों खुद सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करते।
क्यों हम किसी कानूनी दबाव का इन्तजार करते हैं।
क्यों हम अपने आप से यह वादा नहीं करते , की मैं अपने आप ही इस नियम का पालन करूँगा।
और जिस दिन हमें इसका जवाब मिल जायेगा तो हम देखेंगे की हम बिना अपने ऊपर नियम को थोपे इस नियम के अनुसार काम कर सकते हैं।
मैं अपील करना चाहूँगा दिल्ली की जनता से की वो अगली तिथि का इन्तजार ना करे, इस नियम के लागू होने का।
आज से, अब से , अपने आप से इस नियम को लागू कर ले।
फिर देखो हमारा देश कहाँ पहुँचता है
और यह अपील सिर्फ दिल्लीवासियों के लिए नहीं है। हम सब इसका हिस्सा है , चाहे हम भारत के किसी भी प्रान्त में रहते हों।

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